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Vastu Tips: घर में खुशियां नहीं टिकतीं, हर वक्त टेंशन रहती है? तो आज से ही शुरू कर दें ये 8 काम

Vastu Tips: कई घरों में सब कुछ ठीक दिखता है फिर भी मन को शांति नहीं मिलती। बिना वजह चिड़चिड़ापन बात-बात पर तनाव और घर में अजीब-सी बेचैनी बनी रहती है। अक्सर लोग इसका कारण बाहर ढूंढते हैं लेकिन बहुत बार वजह घर के अंदर की छोटी-छोटी आदतें होती हैं। अगर समय रहते इन बातों पर ध्यान दे दिया जाए तो घर का माहौल धीरे-धीरे हल्का और सकारात्मक बनने लगता है।

1. सुबह घर में धूप और ताजी हवा आने दें

दिन की शुरुआत अंधेरे और बंद माहौल में होने से मन भारी रहता है। सुबह कुछ देर खिड़कियां खोलकर धूप और हवा आने दें। इससे घर का वातावरण हल्का होता है और मन भी शांत रहता है।

2. घर के कोनों में जमा बेकार सामान हटाएं

घर के कोनों में रखा टूटा-फूटा या बेकार सामान अनजाने में तनाव बढ़ाता है। जब चीज़ें बेवजह जमा रहती हैं, तो दिमाग भी उलझा-सा रहता है। हल्का घर, हल्का मन पैदा करता है।

3. रसोई को साफ और व्यवस्थित रखें

रसोई का सीधा असर पूरे घर के मूड पर पड़ता है। गंदी या अस्त-व्यस्त रसोई में बना खाना मन को भी भारी कर देता है। रोज़ थोड़ा समय निकालकर रसोई को सहेजना बहुत जरूरी है।

4. सोने से पहले घर में शोर-शराबा कम करें

रात के समय तेज आवाज़, बहस या टीवी का ज्यादा शोर घर की शांति बिगाड़ देता है। सोने से पहले घर का माहौल जितना शांत होगा, नींद उतनी अच्छी आएगी और अगला दिन हल्का महसूस होगा।

5. घर में बातचीत की भाषा पर ध्यान दें

कटु शब्द और बार-बार शिकायत करने की आदत घर की खुशियों को धीरे-धीरे खत्म कर देती है। कोशिश करें कि बात करते समय शब्दों में नरमी और समझ बनी रहे।

6. रोज़ कुछ देर सफाई को समय दें

सिर्फ झाड़ू-पोछा ही नहीं, बल्कि चीज़ों को सही जगह पर रखना भी जरूरी है। जब घर सजा-संवरा रहता है, तो मन अपने आप शांत होने लगता है।

7. घर में पौधे या हरियाली रखें

थोड़ी-सी हरियाली भी घर के माहौल को बदल देती है। पौधे न सिर्फ देखने में अच्छे लगते हैं, बल्कि मन को भी सुकून देते हैं और नकारात्मकता कम करते हैं।

8. सोने की जगह को हल्का और साफ रखें

बिस्तर के आसपास ज्यादा सामान, पुराने कपड़े या फालतू चीज़ें न रखें। साफ और खुली जगह में नींद अच्छी आती है, जिससे तनाव अपने आप कम होने लगता है।

Disclaimer: यह लेख सामान्य अनुभवों, जीवनशैली से जुड़ी आदतों और लोक-मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जागरूकता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना है, न कि किसी प्रकार का पक्का या वैज्ञानिक दावा।

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